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जीवन - डगर -२


अत्यधिक ख़ुशी व अत्यधिक ग़म मे ही अध्यात्म (स्वत: का ज्ञान ) वास्ते आदमी ईश्वरीय शक्ति को याद करता है। व्याकुल मन देहरादून से ॠषिकेष मे माँ गंगा के पावन तट पहुँच गया। गंगा-स्नान के बाद  छोटी सी सुन्दर  पहाड़ी पर अवस्थित स्वामी शिवानन्द महाराज के आश्रम पहुँच स्वामी के दर्शन बाद उनको अपनी असफलता की गाथा सुनाई- कैसे मैं  एयरफ़ोर्स के सेलेक्शन  से वंचित हो आसमान मे उड़ान भरते -भरते रह गया। 

मेरा दिल बैठा देख उसी क्षण स्वामी के शब्द निकले-  ”ख़्वाहिश अगर दिलोजान से निकली हो ,उसमें पवित्रता हो ,सच्ची शिद्दत हो तो उसमें एक अजीब सी Electro Magnetic Energy निकलती है। वो ,जो एक रफ़्तार देती है ,एक ऐसी सुबह देती है जो अवश्य ही सोचे हुए सृष्टि को साकार करती है।" शान्त मन ,बच्चों की मासुमियत सी मुसकान ओर उनकी सादादिली ने इस क़दर प्रभावित किया मानो उनका गौतमबुद्ध सरीखा व्यक्तित्व मेरे राह को आलोकित कर रहा हो। 

    स्वामी के विचारों से मिली उर्जा को सहेजता हुआ दिल्ली लौट डिफ़ेन्स -रिसर्च के साक्षात्कार के परिणाम से वाक़िफ़ हो मन मे कुछ कर गुज़रने के विश्वास के साथ शिद्दत से परिणाममूलक कर्तव्य -पथ की ओर अग्रसर हुआ — व्यक्तित्व देश - दुनिया के सामने है। 

   उतर-पूर्वी भू-भाग मे , प्रकृति की गोद मे, विद्या के मंदिर मे, भावी पीढ़ी को राह दिखाने जब माँ सरस्वती जिह्वा पर बैठ ब्रह्म रूपी शब्द को उच्चारित कर रही हो, उस समय आत्मा का परमात्मा से मिलन वाक़ई रामेश्वरम के मसजिद वाली गली जहाँ  थोड़ी ही दूर पर भूत - भावन भगवान भोले विराजमान थे उसकी वैसे ही परिक्रमा करना जैसे आम दर्शनार्थी करते थे, अध्यात्म का भान ही तो था जो पढ़ते-पढ़ाते निर्वाण को प्राप्त हुआ । 

                बचपन से ही एक अद्वितीय प्रतिभा , अदभूत मेधा , एक ललक, एक लगन तथा एक ऐसी आत्मविश्वास को दिखाता रहा जो मिशाईल की तरह आसमान की उचाईयो को छूता रहा। अबुल कलाम आज़ाद ने सामाजिक , शैक्षणिक , सांस्कृतिक , सांवैधानिक मूल्यों के साथ जीवन - मूल्यों को इस तरह परिभाषित किया है जिससे नैतिकता बलवती तो होती ही है  साथ ही जितनी बड़ी असफलता सामने  उतनी ही  बड़ी सफलता इस सत्य को भी समीचीन बनाती है। नमन है उस महान प्रतिभा को जिसने “ जीने की राह “ ही नहीं बताया बल्कि “राह कैसे निष्कंटक हो “इसका सुझाव भी दिया । 
  रामेश्वरम की पवित्र धरती को शत -शत नमन।
मनोज सिंह

मनोज सिंह

A very rare combination of man of laureate and an IPS officer. He has been writing from his heart. Even after his very tight routine, he manages to express his state of heart in the form of garland of words.

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