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गीता दर्शन - 22


गीता में विरोधाभास - 4
आदि-अनंत की परिसीमाओं से परे तथा सर्वदा विद्यमान रहने वाले सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सभी प्रकार के कल्याणकारी विचारों का समावेश है। वस्तुतः all-inclusive रहना ही इसे eternal बनाता है। सत्य, शिव और सुंदर की परिभाषा जिस भी यम, नियम अथवा विषय पर घटित हो जाए, वह सनातन धर्म का अंग है। ऋग्वेद का बड़ा ही crystal-clear उद्घोष है -
"आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः।"
( हमारे पास सभी ओर से ऐसे कल्याणकारी विचार आते रहें, जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों।) 

सनातन धर्म का उद्देश्य व्यक्ति को मोक्ष /आध्यात्मिक स्वतंत्रता (spiritual freedom) प्राप्त करवाना है, जिससे व्यक्ति अपने परम रूप (ब्रह्म) को प्राप्त कर ले। साथ ही वह जीवन को Grand cosmic plan का एक अटूट हिस्सा मानता है। और इसीलिए जीवन को उसकी संपूर्णता के साथ जीना ही इस धर्म का पालन करना है। हर व्यक्ति के जीवन जीने का तरीका भिन्न हो सकता है और इसी कारण इस universal wisdom में सदैव enrichment होते रहते हैं। Different और diversified प्रतीत होने वाले सारे विचारों को बड़े ही सूक्ष्म तरीके से इस व्यवस्था ने unified किया है -" एकम सत, विप्रा बहुधा वदन्ति।" सत्य एक है, जिसे बुद्धिमान विभिन्न नामों से बुलाते हैं। अलग-अलग विचार विभिन्न दिशाओं से आने वाली मात्र नदियाँ  हैं, जो अंततः एक ही सागर में विलीन होंगे।

श्रीमद्भागवत गीता सनातन धर्म को व्यक्त करते समस्त वेदों और उपनिषदों के ज्ञान का सार है। और यही कारण है कि उसमें सभी प्रचलित मान्यताओं और विभिन्न आध्यात्मिक मार्गों का उल्लेख किया गया है। गीता के लिए कुछ भी त्याज्य नहीं है; वह सर्वग्राही है। उसे कर्म योग की कर्मठता भी अच्छी लगती है और राजयोग की हठधर्मिता भी। ज्ञान योग और निराकार ब्रह्म का अनुष्ठान से भी उसे परहेज नहीं है और रस से भरे भक्ति मार्ग का अवलंबन भी उसे अच्छा लगता है। गीता ज्ञान अर्जुन को मात्र एक व्यक्ति नहीं मानती, वरन् उसे पूरे मनुष्य समाज के प्रतिनिधि के रूप में treat करती है। उसके लिए सभी मानव अर्जुन हैं और उनका जीवन कुरुक्षेत्र का मैदान है, जहाँ सब अपना-अपना धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं। सब का युद्ध अलग अलग है और इसीलिए सब के लिए संदेश भी अलग-अलग। 

Shrawan Singh

Shrawan Singh

An engineer(IITian) by qualification, educationist by profession and mythologist by passion. He fathoms up to the deeper roots of mythological stories and wisdom enshrined in our Sanatana dharma texts like Vedas, Puranas, Epics and specially Gita. He is a naturally gifted speaker and enthrall the audience with the waves of his rhythmic intonation and way of story-telling.

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