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गीता दर्शन -18


संरक्षित ऊर्जा क्या करेगी ? सिस्टम में बॉडी की  energy दो प्रकार की होती है एक  self energy और दूसरा intercational potential energy. कैलाश पर्वत पर शिव लोक में परस्पर चिर प्रतिद्वंद्वी मोर और सांप भी अपनी प्रकृति के विपरीत साथ में रहते हैं । यह इंटरेक्शन इनर्जी की वजह से ही संभव है। स्थान विशेष पर वातावरण में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा इनके हिंसक स्वभाव पर प्रभावी साबित हो गया है और ये अपनी-अपनी स्वभाव के विपरीत एक साथ सुखी हैं। ऐसा नहीं है कि इनका स्वभाव परिवर्तन हो गया है । यह तो बस वातावरण में फैले हुए सकारात्मक उर्जा में डूबे हुए हैं। ज्ञानवान जीवात्मा भी वातावरण में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा के साथ इंटरेक्ट करके अपनी उर्जा से ऊपर उठ जाते हैं । जीवात्मा का ब्रह्मांड और  field line का inclination जैसा भी हो,सिस्टम में सकारात्मक ऊर्जा से interact कर अपनी व्यक्तिगत सीमाओं से ऊपर उठ सकता है।श्री कृष्ण भी अंत में यही आवाहन करते हैं 
 सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥
श्री कृष्ण रूपी ऊर्जा से interact करिये और आपकी खुद की  field lines कैसी भी हो, interaction energy आपको सकारात्मकता और शुचिता की पराकाष्ठा और चरमोत्कर्ष शांति प्रदान अवश्य करेगा। अतः आप जहां भी हैं अपनी ओर से सकारात्मक उर्जा का रेडिएशन कीजिए और श्रीकृष्ण से जुड़ने की कोशिश करते हुए  interaction energy के माध्यम से उस परम संतत्व को प्राप्त हो जाइए।यह interaction energy आपकी प्रकृति को धीरे-धीरे  align कर देगी और आपकी प्रकृति स्वत: आपको उसी के अनुरूप कर्म करने के लिए प्रेरित करती रहेगी। जैसे जैसे प्रकृति बदलती है, वैसे वैसे field lines का distortion भी बदलता है। प्रकृति ही कर्म का दिशा तय करती है अत: जैसे- जैसे प्रकृति में बदलाव आएगा  कर्म स्वत: स्व कल्याण और जनकल्याण के अनुरूप चलने के लिए आपको प्रेरित करेगा। एक बार अगर आपके कर्म के अनुरूप बने self energy और  interactional energy synchronized हो गए फिर धीरे-धीरे यह स्व का भाव पिघलने लगेगा और आप उस सिस्टम के interaction में घुल जाएंगे। जीवात्मा को सबसे पहले अपने  field lines का alignment देखना चाहिए, फिर वातावरण ऐसा खोजना चाहिए जिसमें  interaction के सहारे  स्व की सीमा से बाहर निकला जा सके। तत्पश्चात अपनी सारी स्व ऊर्जा को सिस्टम में मिलाकर  interaction में मिला देना चाहिए। वातावरण में  interaction energy हम सबके द्वारा radiate किए गये सकारात्मक ऊर्जा से ही आएगा। अत: दूसरे के field lines को चेंज करने या दूसरे के ब्रह्मांड में इंटरफेयर करने का प्रयास करने से बेहतर वातावरण में interaction energy की शुचिता और गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयास करते हुए उसी घुल-मिल में जाना ही होगा।
Sanjeev Jha

Sanjeev Jha

He is a writer and philosopher by nature.He had engrossed himself in writing for magazines like OUTLOOK and Vedant Keshari in his college days itself. Greatly Influenced by the learning shri Geeta Ji after completing engineering, he joined software industry, but a writer in his inner soul drived him in the noble profession of teaching and mentoring through the inner philosophy.

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