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गीता दर्शन -21


गीता में विरोधाभास- 3
ऐतरेय ब्राह्मण का उदघोष- "चरैवेति, चरैवेति" ही जीवन की मूल प्राणशक्ति है। जीवन चलते जाने का नाम है; वह एक अनवरत बहती धारा है। वह ना तो केंद्र पर टिकी रहती है, ना परिधियों में भटकती रहती है। वह कभी केंद्र से परिधि की यात्रा है, तो कभी परिधि से केंद्र की ओर सिमटते जाने की कथा। जीवंतता सीधी रेखा से परिभाषित नहीं होती, वरन वह तो sinusoidal wave द्वारा निरूपित होती है। और इसीलिए जीवन जीने के लिए कोई एक ही निष्कर्ष निकाल पाना एक असंभव और व्यर्थ कार्य है। 

और इसीलिए जीवन जीने का manual भी एकांगी और एक मार्गी नहीं हो सकता! उसे तो इस बहती धारा के कण-कण और क्षण-क्षण को अपनी discontinuity द्वारा एक continuity में निर्देशित करना है। अगर जीवन विविधता से भरा है, तो उसका विज्ञान भी diversified होना चाहिए। गीता मे प्रतीत हो रहे आभासी विरोधाभास वस्तुतः उसका दूषण नहीं, भूषण है। 

खुद अपने जीवन का भी सूक्ष्म अवलोकन करने पर हम पाते हैं कि हमारा व्यक्तित्व, हमारी मानसिकता, हमारी प्राथमिकताएें हमारी जरूरतें समय-समय पर बदलती रहती है। कभी हमारे अंदर की सक्रिय ऊर्जा हमें कार्यरत रखती है, तो कभी अंदर जागृत जिज्ञासा नई नई चीजों के बारे में जानने की ओर प्रेरित करती है। कभी आत्मविश्वास से लबालब हो हम जीवन को अपने नियंत्रण में मानते हैं, तो कभी किसी परम सत्ता के आगे हम खुद का समर्पण कर देते हैं। कभी साधना अच्छी लगती है तो कभी उपासना। श्रीमद्भागवत गीता हमारी विचारधारा में होने वाले इन परिवर्तनों को बिल्कुल natural मानती है और इसीलिए उसने अपने विज्ञान में कर्मयोग, ज्ञानयोग, राजयोग और भक्तियोग- सब को उचित स्थान दिया है।

गीता प्रवृत्ति मार्ग और निवृत्ति मार्ग दोनों को जीवन का अभिन्न अंग मानती है। उसके लिए जीवन के व्रत में केंद्र और परिधि एक दूसरे के पूरक है। केंद्र वृत्त की शक्ति का स्रोत है और परिधि उसका विस्तार। उसका विज्ञान केंद्र में रहकर भी विस्तार के आनंद की विधि बताता है और परिधि में घूमते हुए अपनी स्रोत को भी भूलने नहीं देता। प्रवृत्ति और निवृत्ति दो विपरीत ध्रुव नहीं, बल्कि जीवन यात्रा की सफलता सुनिश्चित करने के दो मार्ग हैं।

Shrawan Singh

Shrawan Singh

An engineer(IITian) by qualification, educationist by profession and mythologist by passion. He fathoms up to the deeper roots of mythological stories and wisdom enshrined in our Sanatana dharma texts like Vedas, Puranas, Epics and specially Gita. He is a naturally gifted speaker and enthrall the audience with the waves of his rhythmic intonation and way of story-telling.

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