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गीता दर्शन -13


श्रीमद्भागवत गीता को जिंदगी जीने का manual यूँ ही नहीं कहते; चाहे वह गहरे आध्यात्मिक प्रश्न हों या हमारे day to day behavior का मामूली सा issue, इन 700 श्लोंको मे फैला ज्ञान हमारे लिए हर मोड़ पर सही मार्ग प्रशस्त करता है। जन्म लेने के साथ ही हम एक साथ तीन institutions से जुड़ जाते हैं-शरीर(body), समाज(societal realtionships) और ब्रह्मांड( natural resources and environment)। तीनों अलग-अलग होते हुए भी एक दूसरे में समाहित है और सही मायनों में यह विभेदीकरण बड़ा ही जटिल है।

शरीर ,समाज और ब्रह्मांड से यह जुड़ाव हमारी पूरी उम्र तक बना रहता है और वस्तुतः हमारे जीवन की पूरी कहानी, पूरी जीवन यात्रा इन्हीं तीनों के उचित-अनुचित- समुचित उपयोग के इर्द-गिर्द बुनी होती है। किसी जल स्रोत के एक निश्चित दिशा में प्रवाह होते रहने की नियमितता और स्वच्छंदता को निश्चित करने के लिए आवश्यक है कि वह दो पाटो (banks) की मर्यादा में बहे। सफर के साथ व्यक्तित्व को एकाकार करने के लिए और उसका पूर्ण आनंद लेने के लिए आवश्यक है कि रास्ते पूरी तरह से जाने पहचाने हों; हम बारंबार उसी रास्ते से गुजरते रहे हों। regularity, continuity और guidelines का proper अनुशासन और अनुशीलन ही हमारी मुक्तता (freedom) को जीवन मे establish और maintain करता है।

अध्याय 17 में हमारे लिए कुछ समुचित व्यवहार नियत किए गए हैं, जो इन तीनों संस्थाओं के साथ हमारे संबंधों को और प्रगाढ़ करते है। क्योंकि हम इनका उपयोग करते हैं, इसीलिए इन्हें replenish और strengthen करना हमारा दायित्व बनता है। तप, दान और यज्ञ के concepts का evolution गीता में इसी संदर्भ में किया गया है- शरीर के लिए तप, सामाजिक संबंधों के लिए दान और प्रकृति के लिए यज्ञ। तप, दान और यज्ञ भी इनसे पोषित संस्थाओं की तरह एक दूसरे में समाहित है। इन तीनों क्रियाओं को प्राण और शक्ति देती है श्रद्धा; उसके अभाव में अपना अभीष्ट पूर्ण नहीं हो पाएगा। अतएव श्रद्धायुक्त इन तीनों क्रियाओं का आयोजन तीनों संस्थाओं के sustainable utilisation को सुनिश्चित करेगा और जीवन को सहजता, सुगमता और समत्व की त्रिवेणी का संगम बना देगा।


Shrawan Singh

Shrawan Singh

An engineer(IITian) by qualification, educationist by profession and mythologist by passion. He fathoms up to the deeper roots of mythological stories and wisdom enshrined in our Sanatana dharma texts like Vedas, Puranas, Epics and specially Gita. He is a naturally gifted speaker and enthrall the audience with the waves of his rhythmic intonation and way of story-telling.

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