Flash Stories
recent

गीता दर्शन - 3


गुरु- शिष्य परंपरा के अनूठे आख्यान श्रीमद्भागवत गीता की युगांतकारी दिव्य वाणी का पटाक्षेप एक अद्भुत संयोग और जीवन को उसके महत्व सार्थकता की ओर प्रेषित करते अनूठे संगम से हुई है |

यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर: |
तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ||

ज्ञान और भक्ति के दो किनारों के बीच बहती कर्म की सरिता के प्रवाह की नियति इससे बेहतर तो हो ही नहीं सकती थी| ज्ञान के प्रकाश से आलोकित और भक्ति के सामर्थ्य पर अवलंबित निष्काम कर्म की इस यात्रा का इतना सटीक निष्कर्ष इस विलक्षण ध्रुव सत्य द्वारा ही संभव है|

गीता का ज्ञान श्रेष्ठ बनने का ज्ञान है | आप जीवन के किसी कर्मक्षेत्र में रहो ,उसमें अपनी श्रेष्ठता प्राप्त करने का रास्ता बताती है गीता | सामाजिक तंत्र व्यवस्था में जो भी role आप निभा रहे हो , उसमें role-model बनने का प्रावधान है गीता | "योगा कर्मसु कौशलम् " - अपने कर्म में कुशलता लाने का ज्ञान विज्ञान है गीता |गुरु की उदात्त गुरुता का प्राण है गीता ;शिष्य की महत् शिष्यत्व का प्रमाण है गीता |सच्चे गुरु हैं कृष्ण सरीखे और सच्चा शिष्य है अर्जुन जैसे |अपने अपने भूमिकाओं में जैसे ही शिक्षा के दोनों आयाम perfection पाते हैं वही सुनिश्चित होती है सफलता |सफलता ,जो जीवन में वैभव लाती है और व्यक्तित्व में अक्षुण्ण शक्ति का संचार करवाती है | सफलता जो निश्चित है ,दीर्घकालीन है और देशकाल परिस्थितियों के अनुसार नीति सम्मत है |

गुरु शिष्य के मध्य उद्घाटित और उद्भवित शिक्षा और शिक्षण विधि का कर्म शास्त्र और दर्शनशास्त्र है गीता | 700 श्लोकों और 18 अध्यायों में फैले ज्ञान के इस गंगा का विस्तार किसी को चमत्कृत ,विस्मृत या confused ना कर दे, इसीलिए पूरे ज्ञान को बिल्कुल ही सरल और सुगम रूप से conclude कर दिया गया | कृष्ण और अर्जुन का simultaneous existence ही necessary and sufficient condition है success पाने का| ज्ञान की पराकाष्ठा को फलीभूत और जीवंत होने के लिए perfect गुरु - कृष्ण और perfect शिष्य- अर्जुन के मिलन की आवश्यकता है |

हम सब अपने जीवन में हर क्षण या तो कुछ सीखते रहते हैं या हमें देख कर कोई दूसरा सीखता रहता है |हम जीवन जीते-जीते कृष्ण और अर्जुन दोनों की भूमिका निभाते रहते हैं | जीवन को उसकी जीवंतता और संपूर्णता से जीने का गीता का सरल सा संदेश है - जब सीखो तो अर्जुन बन जाओ और जब सिखाओ तो कृष्ण हो जाओ| student भी best बनो और teacher भी best ही बनो |



Shrawan Singh

Shrawan Singh

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.