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Spirituality

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गीता दर्शन - 16

श्रीमद्भागवत गीता का विज्ञान क्रमिक, उत्तरोत्तर और सतत परिवर्तन के सिद्धांत का उद्घोषक है और यह चेतना/बुद्धि के किसी भी स्तर पर अवस्थि...
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गीता दर्शन - 15

श्रीमद भगवत गीता जी का सबसे ज्यादा घिसने -पिटने वाला श्लोक शायद " कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन  " ही है । ज्यादातर समय...
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गीता दर्शन -14

एक मनुष्य के ब्रह्मांड को तीन Co-centric Spheres द्वारा निरूपित किया जा सकता है - व्यक्ति ,उसका समाज और आसपास का वातावरण। सबसे...
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गीता दर्शन -13

श्रीमद्भागवत गीता को जिंदगी जीने का manual यूँ ही नहीं कहते; चाहे वह गहरे आध्यात्मिक प्रश्न हों या हमारे day to day behavior का मामूली ...
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गीता दर्शन - 12

                               स्वधर्म- 3 मानव मन में चल रहे विचार श्रृंखला की एक बड़ी ही विस्मयकारी विशेषता है कि, जो उसे सहजता से प्र...
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गीता दर्शन -11

                                                              स्वधर्म -2 तीनों गुणों के mixing से मनुष्य का वर्ण निर्धारित हुआ, जिसने...
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गीता दर्शन -10

                               स्वधर्म -1 अपने जीवन में गीता के ज्ञान का holistic application उसे सहजता, सुगमता एवं सामंजस्य से भर द...
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गीता दर्शन -9

जीवन को उसकी संपूर्णता की ओर अग्रसर करते गीता-ज्ञान की एक बहुत बड़ी विशेषता है| हर श्लोक की गहराई में गए बिना भी अगर केवल श्रीमद्भागवत...
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गीता दर्शन - 8

मानवीय संबंधों की जैसी subtle और holistic व्याख्या श्रीमद्भागवत गीता में की गई है, वह अन्यत्र किसी भी ग्रंथ में मिलना दुर्लभ है | योगे...
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गीता दर्शन -7

जीने की कला का विधान है श्रीमद्भागवत गीता| जीवन का कोई भी पहलू इससे अछूता नहीं बचा है| यह मानवीय जीवन को उसके चरम तक, उसके उत्थान तक प...
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